रजनीश कुमार, गढ़वा
स्थानीय नरगिर आश्रम, गढ़देवी मोहल्ला में चैत्र नवरात्र के अवसर पर आयोजित नवाह पाठ सह रामकथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। खासकर महिला श्रद्धालुओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। पूरा वातावरण भक्ति, उल्लास और धार्मिक उत्साह से सराबोर दिखा। इस अवसर पर राम विवाह की आकर्षक झांकी निकाली गई, जिसने सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। गढ़देवी मोड़ से भगवान श्रीराम की बारात भव्य रूप में निकली, जिसमें रोड लाइट, बैंड-बाजा और आतिशबाजी के साथ श्रद्धालु झूमते-नाचते नजर आए। आयोजक मंडली के सदस्यों ने “जय श्री राम” के जयघोष के साथ जमकर ठुमके लगाए, जिससे माहौल पूरी तरह राममय हो गया। सीता जी की ओर से बारातियों का स्वागत पारंपरिक विवाह गीतों के साथ किया गया। जैसे ही भगवान राम द्वारा शिव धनुष तोड़ने की लीला प्रस्तुत की गई, पूरा पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा। इसके साथ ही राम-सीता विवाह की जीवंत प्रस्तुति ने सभी को भावविभोर कर दिया।
कथा के दौरान बताया गया कि राजा जनक ने प्रतिज्ञा की थी कि जो भगवान शिव के धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। भगवान राम ने न केवल धनुष उठाया, बल्कि प्रत्यंचा चढ़ाते समय उसे तोड़ दिया। इसके बाद राम-सीता का विवाह संपन्न हुआ। साथ ही उर्मिला-लक्ष्मण, भरत-मांडवी और शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति के विवाह का भी वर्णन किया गया, जो मिथिला और अयोध्या के बीच एक भव्य उत्सव के रूप में मनाया गया। राम-सीता का यह विवाह प्रेम, त्याग और साझा जिम्मेदारी का सर्वोत्तम आदर्श माना जाता है, जिसे कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को समझाया गया। अयोध्या से पधारे संत बालस्वामी प्रपन्नाचार्य एवं उनके मंडली के गायकों ने कर्णप्रिय विवाह गीत और सोहर प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बालस्वामी जी ने कथा में राम विवाह से पूर्व की घटनाओं का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि ऋषि विश्वामित्र ने ताड़का, मारीच और सुबाहु जैसे राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को अपने साथ वन ले जाने का आग्रह किया था। प्रारंभ में दशरथ जी इसके लिए तैयार नहीं थे, लेकिन गुरु वशिष्ठ के समझाने पर उन्होंने सहमति दी। अपने प्रवचन में बालस्वामी जी ने कहा कि मनुष्य के दुःख का मुख्य कारण उसकी अत्यधिक इच्छाएं और कामनाएं हैं। जिनकी इच्छाएं सीमित होती हैं, उनके दुःख भी कम होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन और पूर्ण विश्वास के साथ ईश्वर से प्रार्थना करता है, तो उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं। संत के माध्यम से भक्तों की व्यथा जब ईश्वर तक पहुंचती है, तो वह कथा का रूप ले लेती है। रामकथा समिति के अध्यक्ष चन्दन जायसवाल ने बताया कि यह कथा 26 मार्च तक जारी रहेगी। इसके उपरांत नवमी के दिन हवन एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा का श्रवण करने और पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की।












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