एएनएम तारामणि कुजूर पर गंभीर आरोप
माता-पिता का नाम बदलकर बच्ची ले गए दंपती
पहले मरीज भेजने पर पांच हजार रुपये कमीशन का मामला भी आया था सामने, अब नया खुलासा
रजनीश कुमार, गढ़वा
गढ़वा सदर अस्पताल में एक बड़े षड्यंत्र का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। अस्पताल के कर्मियों की कथित मिलीभगत से दत्तक (एडाप्शन) कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नि:संतान अथवा मनचाही संतान के इच्छुक दंपती यदि कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना संतान चाहते हैं तो उन्हें बस सदर अस्पताल में कार्यरत एएनएम तारामणि कुजूर से संपर्क करना होगा। इसके बाद अवैध तरीके से नवजात को सौंप देने का रास्ता तैयार हो जाता है।
सदर अस्पताल से जुड़ा ऐसा ही एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका खुलासा होते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि हाल ही में सदर अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजे जाने और उसके एवज में प्रति मरीज पांच हजार रुपये कमीशन लेने का मामला भी सामने आया था। उस मामले की जांच गढ़वा के अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने उपायुक्त के निर्देश पर की थी और रिपोर्ट भी सौंपी थी, लेकिन संबंधित एएनएम पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी बीच दत्तक कानून की धज्जियां उड़ाने का यह नया मामला सामने आ गया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए सदर अस्पताल की उपाधीक्षक ने एएनएम तारामणि कुजूर से स्पष्टीकरण मांगा है।
क्या है पूरा मामला
गढ़वा शहर के पाठक मोहल्ला निवासी रवि कुमार की 32 वर्षीय पत्नी रूपा देवी को 21 फरवरी 2026 को दोपहर दो बजे प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसी दिन दोपहर 2:35 बजे उसका प्रसव हुआ और उसने एक बच्ची को जन्म दिया। बताया गया कि उसके पहले से ही तीन बच्चियां थीं।
सूत्रों के अनुसार प्रसव से पहले ही अल्ट्रासाउंड जांच में उसे पता चल गया था कि गर्भ में पल रही संतान भी बच्ची है। इसके बाद उसने पलामू जिले के हैदरनगर निवासी अपने नि:संतान भाई-भौजाई को बच्ची देने की बात तय कर ली थी।
प्रसव के समय अस्पताल के ओपीडी पर्ची, बेडहेड टिकट पर्ची, ओपीडी रजिस्टर, प्रसव रजिस्टर, एल-3 फार्मेट तथा जन्म प्रमाण पत्र के लिए भरे गए पिंक फार्म में नवजात शिशु के माता-पिता के रूप में रूपा देवी एवं उसके पति लव कुमार का नाम दर्ज था। इसी बीच हैदरनगर निवासी राजू कुमार कांस्यकार और उसकी पत्नी कामिनी साहु भी सदर अस्पताल पहुंच गए। प्रसूता, उसके पति तथा उनके भाई-भौजाई ने प्रसव कक्ष में सुबह नौ बजे से शाम तीन बजे की शिफ्ट में ड्यूटी कर रही नर्सों से आग्रह किया कि सभी रजिस्टरों में माता-पिता के स्थान पर कामिनी साहु और राजू कुमार कांस्यकार का नाम दर्ज कर दिया जाए। हालांकि उस समय ड्यूटी पर मौजूद नर्सों ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। बताया गया कि बाद में दूसरी शिफ्ट में ड्यूटी पर आई एएनएम तारामणि कुजूर ने सभी रजिस्टरों में काटछांट कर नवजात शिशु के माता-पिता और पते में बदलाव कर दिया। रजिस्टर में प्रसूता का नाम कामिनी साहु उम्र 29 वर्ष तथा पति का नाम राजू कुमार कांस्यकार दर्ज कर दिया गया। इतना ही नहीं, जन्म प्रमाण पत्र के लिए भरे गए पिंक फार्म में भी बालपेन से काटकर नवजात के माता-पिता का नाम और पता बदल दिया गया। इसके बाद कामिनी साहु और राजू कुमार कांस्यकार सदर अस्पताल से ही नवजात बच्ची को अपने साथ ले गए।
बताया जा रहा है कि इसके पीछे यह सोच थी कि जन्म प्रमाण पत्र में भी वही नाम दर्ज हो जाएगा और बाद में किसी तरह की कानूनी परेशानी नहीं होगी।
ऐसे हुआ पूरे मामले का भंडाफोड़
बताया जाता है कि 12 मार्च को प्रसूता रूपा देवी और उसके पति लव कुमार दोबारा सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने नर्सों से पेट में दर्द की शिकायत की और दूध सुखाने की दवा मांगने लगे।
संयोग से उस समय ड्यूटी पर वही नर्सों की टीम मौजूद थी जिसने उसका प्रसव कराया था। बातचीत के दौरान नवजात बच्ची को भाई-भौजाई को देने तथा रजिस्टर में नाम बदलने का पूरा मामला सामने आ गया।
इसके बाद लेबर रूम की इंचार्ज नर्स ने पूरे घटनाक्रम की लिखित जानकारी सदर अस्पताल की उपाधीक्षक को दी। उपाधीक्षक ने एएनएम तारामणि कुजूर से स्पष्टीकरण मांग लिया है।
अब देखना यह है कि इस सनसनीखेज मामले में प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी सदर अस्पताल के अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
मामले की जानकारी मिली है।
सरकारी दस्तावेज में छेड़छाड़ एक गंभीर मामला है। मामले में लिखित शिकायत भी उपलब्ध हुआ है। जिसकी जांच की जा रही है। जिन लोगों के बारे में शिकायत मिली है उनसे स्पष्टीकरण की मांग किया गया है | लोगों के द्वारा स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया गया है। मामले में जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
डॉ माहेरु यामानी, उपाधीक्षक सदर अस्पताल गढ़वा।
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