रजनीश कुमार, गढ़वा
गढ़वा नगर परिषद चुनाव की मतपेटियां सील हो चुकी हैं, लेकिन प्रत्याशियों की धड़कनें अब भी खुली किताब की तरह तेज चल रही हैं। यही रात अंतिम, यही रात भारी… क्योंकि कल शुक्रवार को मतगणना है और भाग्य का फैसला होने वाला है। किसी के घर समर्थकों की फुसफुसाहट है, तो कहीं सन्नाटा गहरा गया है। कई प्रत्याशी करवटें बदल रहे हैं—नींद आंखों से कोसों दूर। कुछ मंदिरों में माथा टेक रहे हैं, तो कुछ अपने गणित को आखिरी बार जोड़-घटा कर देख रहे हैं। हर चेहरा कह रहा है—“जीत हमारी तय है!” लेकिन लोकतंत्र का खेल बड़ा दिलचस्प है, यहां ताज किसी एक के सिर ही सजेगा।सुबह की पहली किरण के साथ ईवीएम खुलेंगी और उम्मीदों का सूरज भी चढ़ेगा। अब देखना है, किसकी किस्मत चमकेगी और किसे अगली बार का इंतजार रहेगा।
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