रजनीश कुमार , गढ़वा
नगर परिषद गढ़वा चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वर्तमान नगर परिषद अध्यक्ष लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाने में सफल होंगे, या फिर इस बार जनता किसी नए चेहरे को नगर परिषद गढ़वा की कमान सौंपेगी।
वर्तमान अध्यक्ष ने अपने कार्यकाल के दौरान कई विकास कार्यों का दावा किया है और इन्हीं उपलब्धियों के आधार पर दोबारा जनता के बीच जाने की तैयारी में जुट गए हैं। उनके समर्थक जहां हैट्रिक को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं, वहीं विरोधी खेमे में इस बार सत्ता परिवर्तन की उम्मीद जगने लगी है।
हालांकि नगर परिषद चुनाव औपचारिक रूप से गैर-दलीय होता है, लेकिन व्यवहारिक रूप से सभी प्रमुख राजनीतिक दल सक्रिय हो चुके हैं। अंदरखाने बैठकों का दौर जारी है और रणनीति के तहत समर्थित प्रत्याशियों को निर्दलीय मैदान में उतारने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में अध्यक्ष पद की लड़ाई और भी रोचक होती जा रही है। शहर के मतदाताओं के बीच इस बार विकास कार्यों को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, जर्जर सड़कें, नालियों की समस्या, जलजमाव और स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से चर्चा में हैं। कई वार्डों में जनता मौजूदा व्यवस्था से असंतोष जता रही है, जिसे विपक्षी संभावित प्रत्याशी अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं वर्तमान अध्यक्ष समर्थक यह तर्क दे रहे हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद नगर परिषद में कई योजनाओं को धरातल पर उतारा गया है और अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए एक और मौका मिलना चाहिए।
अधिसूचना जारी होते ही संभावित प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं। जनसंपर्क, सामाजिक आयोजनों में भागीदारी, सुबह की सैर और सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कवायद तेज हो गई है। आने वाले दिनों में नामांकन के साथ ही चुनावी सरगर्मी और बढ़ने की संभावना है।
फिलहाल गढ़वा नगर परिषद का सियासी तापमान चढ़ा हुआ है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता मौजूदा अध्यक्ष पर एक बार फिर भरोसा जताकर उन्हें हैट्रिक का ताज पहनाती है या फिर इस बार बदलाव की बयार किसी नए चेहरे को नगर परिषद की कुर्सी तक पहुंचाती है।












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