समाज को उनके आदर्शों पर चलने का दिया संदेश
रजनीश कुमार, गढ़वा
पाल महासंघ गढ़वा के तत्वावधान में रविवार को राजमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। महासंघ के अध्यक्ष सुधीर कुमार पाल के नेतृत्व में सुबह नीलांबर-पीतांबर भवन के समीप स्थित राजमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा उपस्थित लोगों को जयंती की शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर अध्यक्ष सुधीर कुमार पाल ने कहा कि राजमाता अहिल्याबाई होलकर का जीवन समाज सेवा, न्यायप्रियता और जनकल्याण का प्रतीक रहा है। उन्होंने सभी लोगों से उनके आदर्शों को अपनाकर समाज के उत्थान में योगदान देने का आह्वान किया।
महासंघ के सचिव रमेश पाल ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर धनगर-गडरिया परिवार से होने के बावजूद जाति और धर्म से ऊपर उठकर संपूर्ण मानव समाज के कल्याण के लिए कार्य करती रहीं। उन्होंने शिक्षा, धर्म, संस्कृति और सामाजिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसके कारण आज भी उन्हें आदर्श शासक और महान समाजसेवी के रूप में याद किया जाता है।
उप सचिव बुद्धदेव पाल ने राजमाता को नारी शक्ति का प्रतीक बताते हुए कहा कि महिलाओं को सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने पाल समाज की महिलाओं से समाज निर्माण और विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
माल्यार्पण कार्यक्रम के बाद पाल महासंघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने युवा समाजसेवी राकेश पाल के साथ एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी में समाज के विकास, संगठन की मजबूती तथा सामाजिक कार्यों में सहभागिता बढ़ाने पर चर्चा की गई। राकेश पाल ने सभी पाल परिवारों से सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान देने और समाजहित में सकारात्मक कार्य करने का संकल्प लेने का आग्रह किया। साथ ही वर्ष 2026 में पाल महासंघ का एक भव्य सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। कार्यक्रम में महासंघ के उपाध्यक्ष उमेश पाल, उप सचिव बुद्धदेव पाल एवं सुरेंद्र पाल, जिला संरक्षक सुखबीर पाल, रामावतार पाल, अशर्फी पाल, विजय पाल, रामदास पाल, राम सकल पाल, भोगनाथ पाल, विवेकानंद पाल, योगेंद्र पाल, अभय पाल, दिलीप पाल, अमरदीप पाल, राकेश पाल, नितेश पाल, शिवकुमार पाल, रंजन पाल, सुमित पाल सहित विभिन्न गांवों से आए बड़ी संख्या में पाल समाज के लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन राजमाता अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने और समाज में एकता व जागरूकता बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।











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