रजनीश कुमार, गढ़वा
कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचान रखने वाला गढ़वा जिला अब प्रशासनिक स्थिरता और विकास की नई तस्वीर पेश कर रहा है। इसी बीच झारखंड सरकार द्वारा जारी तबादला आदेश में एक बार फिर गढ़वा को नया उपायुक्त मिला है। खास बात यह है कि गढ़वा के नए डीसी बनाए गए पशुपतिनाथ मिश्रा का इस जिले से पुराना और गहरा जुड़ाव रहा है। पशुपतिनाथ मिश्रा उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने एक ही जिले में एसडीओ, डीडीसी और अब डीसी जैसे तीन महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करने का अवसर प्राप्त किया है। इसे प्रशासनिक सेवा में एक तरह की “हैट्रिक” माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में पशुपतिनाथ मिश्रा की पहली पोस्टिंग गढ़वा में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) के रूप में हुई थी। उस समय गढ़वा जिला नक्सल गतिविधियों को लेकर काफी संवेदनशील माना जाता था। ऐसे दौर में उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और जिले की परिस्थितियों को करीब से समझा। इसके बाद उन्हें गढ़वा में ही उप विकास आयुक्त (डीडीसी) के पद पर कार्य करने का मौका मिला। डीडीसी रहते हुए उन्होंने कई विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग की तथा ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को भी नजदीक से जाना। अब झारखंड सरकार ने उन्हें गढ़वा जिले का उपायुक्त (डीसी) नियुक्त किया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में गढ़वा में नए डीसी के रूप में अन्य अधिकारी की पोस्टिंग हुई थी, लेकिन करीब एक माह के भीतर ही उनका तबादला कर दिया गया। इसके बाद सरकार ने जिले की कमान पशुपतिनाथ मिश्रा को सौंप दी। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि एक ही जिले में तीन बड़े पदों पर कार्य करना किसी भी अधिकारी के लिए गौरव की बात होती है। गढ़वा जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियों से पहले से परिचित होने के कारण लोगों को उम्मीद है कि पशुपतिनाथ मिश्रा जिले के विकास कार्यों को और गति देंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़वा जिला पशुपतिनाथ मिश्रा के लिए काफी “लकी” साबित हुआ है। एक ही जिले में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलना यह दर्शाता है कि सरकार को उनकी कार्यशैली और अनुभव पर भरोसा है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि नए डीसी के रूप में वे जिले में विकास, कानून-व्यवस्था और जनसमस्याओं के समाधान को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।











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