रजनीश कुमार, गढ़वा
कहा जाता है कि किसी भी राजनीतिक दल की असली ताकत उसके कार्यकर्ता होते हैं। कार्यकर्ता ही पार्टी की रीढ़ माने जाते हैं। यदि यही रीढ़ कमजोर पड़ जाए तो संगठन भी कमजोर होने लगता है। गढ़वा जिले में इन दिनों एक ऐसे ही समर्पित कार्यकर्ता की पीड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसने पार्टी और मुख्यमंत्री के समर्थन में खुद को पूरी तरह झोंक दिया, लेकिन आज वही कार्यकर्ता मदद की आस में दर-दर भटकने को मजबूर है। हम बात कर रहे हैं मझिआंव प्रखंड के सेमरहट गांव निवासी सैयद अंसारी की, जो खुद को झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का समर्पित कार्यकर्ता बताते हैं। सैयद का कहना है कि उन्होंने पार्टी के लिए हर स्तर पर काम किया, लेकिन आज उनके कठिन समय में कोई साथ खड़ा नहीं हो रहा है।
सैयद अंसारी ने बताया कि वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने गढ़वा विधानसभा क्षेत्र में मोटरसाइकिल रथ तैयार कर जेएमएम के पक्ष में व्यापक प्रचार-प्रसार किया था। इसके साथ ही झारखंड़ 68 विधानसभा क्षेत्र में मोटरसाईकिल से गांव-गांव घूमकर उन्होंने पार्टी की नीतियों और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संदेश को लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया था। उन्होंने दावा किया कि जब ईडी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार करने पहुंची थी, उस समय उन्होंने विरोध स्वरूप आत्मदाह करने का प्रयास भी किया था। हालांकि वहां पहले से मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया और हिरासत में ले लिया था। उस दौरान यह मामला मीडिया की सुर्खियों में भी रहा था। सैयद का कहना है कि वर्तमान समय में उनका परिवार दहशत और परेशानियों के कारण दूसरे स्थान पर शरण लेने को मजबूर है। उन्होंने बताया कि अपनी समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्री और विधायकों तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल सकी है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि पार्टी के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी होना दुखद है। उनका कहना है कि आज वे सिर्फ मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मिलने का मौका तक नहीं मिल पा रहा है। अब सैयद अंसारी मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुंचाना चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री उनकी बात सुन लें तो शायद उनकी समस्याओं का समाधान निकल सके और उन्हें न्याय मिल सके।













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