गढ़देवी स्थित नरगिर आश्रम में रामकथा की अमृत वर्षा, भक्ति में डूबे श्रद्धालु

रजनीश कुमार, गढ़वा

गढ़देवी मोहल्ला स्थित नरगिर आश्रम में चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर चल रहे नवाह परायण मानस पाठ एवं संध्या में आयोजित रामकथा से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। कथा स्थल पर प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे आश्रम परिसर में आध्यात्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है।
रामकथा के चौथे दिन अयोध्या से पधारे संत बालस्वामी प्रपन्नाचार्य जी ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं के अनेक मनोहारी प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रीराम की बाल लीलाएं अत्यंत दिव्य, मनमोहक और आनंददायक हैं, जिनका सुंदर चित्रण गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के बालकाण्ड में किया है। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि बाल्यकाल में श्रीराम अपने सखाओं के साथ अयोध्या की गलियों में खेलते थे, माता कौशल्या की गोद में किलकारियां भरते थे तथा राजा दशरथ के आंगन में अपने भाइयों के साथ आनंदपूर्वक क्रीड़ा करते थे। उनकी इन लीलाओं में बाल-सुलभ चंचलता के साथ दिव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। प्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि राम की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे भक्तों के लिए ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का प्रतीक हैं, जो मन को आनंद और शांति से भर देती हैं। कथा के दौरान महर्षि वशिष्ठ द्वारा अयोध्या में राजा दशरथ के चारों पुत्रों के नामकरण संस्कार का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और उत्सव के बीच कौशल्या पुत्र का नाम ‘राम’, कैकेयी पुत्र का ‘भरत’ तथा सुमित्रा पुत्रों का ‘लक्ष्मण’ और ‘शत्रुघ्न’ रखा गया। इस अवसर पर ऋषियों द्वारा बालकों के उज्ज्वल भविष्य की भी भविष्यवाणी की गई। संत प्रपन्नाचार्य ने अपने प्रवचन में मोक्ष प्राप्ति के चार प्रमुख मार्गों—भक्ति, ज्ञान, कर्म और वैराग्य—का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर के प्रति निष्काम भाव से की गई भक्ति सर्वोत्तम मानी जाती है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाती है। कथा में काकभुशुंडि का प्रसंग भी सुनाया गया, जिन्हें भगवान शिव के परम भक्त और रामायण के महान ज्ञाता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कौवे के रूप में गरुड़ को रामकथा सुनाई और शिवजी की कृपा से उन्हें रामभक्ति एवं अमरत्व का वरदान प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के अंत में रामकथा समिति के अध्यक्ष चन्दन जायसवाल ने निशुल्क प्रसाद वितरण करने वाले दाताओं के प्रति आभार व्यक्त किया तथा युवा टीम को सफल आयोजन के लिए प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर अपर समाहर्ता राज माहेश्वरम को सम्मानित भी किया गया।

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